सर्वाइकल क्या होता है? कारण, लक्षण और इलाज की पूरी जानकारी

सुबह उठते ही गर्दन अकड़ जाना, कंधों में किसी ने पत्थर रख देने जैसा भारीपन, या दिन भर लैपटॉप के सामने बैठने के बाद गर्दन का जाम हो जाना, अगर ये बातें आपको अपनी कहानी लगती हैं, तो समझ लीजिए आप अकेले नहीं हैं। आजकल “सर्वाइकल” सुनने को हर दूसरे घर में मिलता है, और सोचने वाली बात यह है कि यह अब सिर्फ बुज़ुर्गों की शिकायत नहीं रह गया। तीस और चालीस की उम्र के लोग, यहां तक कि बड़े-बड़े कॉलेज के बच्चे भी गर्दन दर्द लेकर डॉक्टर के पास आने लगे हैं।

वजह समझना मुश्किल नहीं है। हमारी गर्दन पूरे दिन एक ही जगह झुकी हुई रहती है, फोन देखते वक्त, लैपटॉप पर काम करते वक्त, टीवी देखते हुए सोफे में धंसी हुई। आइए जानते हैं कि सर्वाइकल आखिर होता क्या है, क्यों होता है, और इससे कैसे निजात पाई जा सकती है।

सर्वाइकल का मतलब क्या है?

सर्वाइकल अंग्रेज़ी शब्द Cervical का हिंदी रूप है, जिसका मतलब है “गर्दन से जुड़ा हुआ”। हमारी गर्दन की रीढ़ में सात हड्डियां होती हैं (जिन्हें C1 से C7 तक नंबर दिया जाता है), और इन हड्डियों के बीच-बीच छोटे-छोटे गद्दे जैसे ढांचे होते हैं जिन्हें डिस्क कहते हैं। इन्हीं के बीच से नसें निकलकर बांहों और हाथों तक जाती हैं।

जब लोग कहते हैं कि “मुझे सर्वाइकल हो गया है”, तो उनका मतलब आमतौर पर सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस होता है, यानी गर्दन की हड्डियों और डिस्क में घिसाव या दबाव, जिससे दर्द, जकड़न और झुनझुनी जैसी शिकायतें पैदा होती हैं।

यहां एक भ्रम भी दूर कर लें। बाज़ार में “सर्वाइकल” सुनकर कई लोग सर्वाइकल कैंसर की तरफ देखने लगते हैं, दोनों में कोई संबंध नहीं है। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के गर्भाशय के निचले हिस्से से जुड़ा बिल्कुल अलग रोग है। गर्दन दर्द का उससे कोई लेना-देना नहीं।

सर्वाइकल क्यों होता है? जिम्मेदार 7 कारण

गर्दन दर्द की कोई एक वजह नहीं होती। ज़्यादातर मामलों में इन कारणों में से कोई एक या कई साथ-साथ काम करते हैं:

1. उम्र बढ़ना।यह सबसे आम वजह है। उम्र के साथ गर्दन की डिस्क पतली होने लगती हैं और हड्डियों किनारों पर छोटे-छोटे मुंगे जैसी वृद्धि (bone spurs) बनने लगती हैं, जिनसे नसों पर दबाव पड़ सकता है। Mayo Clinic के मुताबिक यह घिसाव लगभग हर व्यक्ति में उम्र के साथ होता है, बस कुछ लोगों को लक्षण महसूस होते हैं, कुछ को नहीं।

2. फोन और लैपटॉप की गलत पोस्चर।जब हम झुकी हुई गर्दन से फोन देखते हैं, तो गर्दन पर अपने आप से कई गुना ज़्यादा बोझ पड़ता है। इसी को “text neck” कहा जाता है। एक अध्ययन में मोबाइल का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करने वालों में से लगभग 65 फीसदी लोगों ने गर्दन दर्द की शिकायत की, दर्द की सबसे आम शिकायत गर्दन की ही थी।

3. मांसपेशियों में खिंचाव।घंटों एक ही मुद्रा में बैठना, तेज़ हवा में सो जाना, या तनाव में कंधे ऊपर चढ़े रहना, इन सबसे गर्दन की मांसपेशियां कस जाती हैं।

4. चोट।अचानक झटका लगना, दुर्घटना, या सिर पर कुछ गिर जाना भी गर्दन की समस्या खड़ी कर सकता है।

5. गलत तरीके से सोना।ऊंचा, मुलायम तकिया और पेट के बल सोने की आदत, गर्दन रातभर गलत कोण में रहती है।

6. शारीरिक गतिविधि होना।पूरे दिन बैठे रहने से गर्दन और पीठ की मांसपेशियां कमजोर पड़ती हैं, और कमजोर मांसपेशियां दर्द को जल्दी पकड़ लेती हैं।

7. धूम्रपान और मोटापा।धूम्रपान डिस्क की उम्र जल्दी बढ़ा देता है, और बढ़ा हुआ वजन रीढ़ पर लगातार दबाव डालता है।

सर्वाइकल के लक्षण: शरीर की चेतावनी को पहचानें

गर्दन की समस्या की अपनी एक खास दिक्कत है, शुरुआती लक्षण इतने हल्के होते हैं कि लोग उन्हें “गलत सोने की वजह” या “थकान” मानकर टाल देते हैं। फिर जब दर्द बांह तक जाने लगता है, तब ध्यान जाता है।

शुरुआती लक्षण आमतौर पर ऐसे दिखते हैं:

  • सुबह उठते ही गर्दन का अकड़ जाना, जो कुछ देर में ठीक हो जाता है
  • गर्दन में हल्की जकड़न, खासकर देर तक कंप्यूटर पर काम करने के बाद
  • दाहिने या बाएं कंधे की ओर बढ़ता हल्का दर्द

बढ़ने पर ये लक्षण दिख सकते हैं:

  • गर्दन से कंधे, बांह और हाथ तक जाता दर्द
  • हाथों या उंगलियों में झुनझुनी या सुन्नपन
  • गर्दन के पीछे से शुरू होने वाला सिरदर्द
  • गर्दन घुमाने में अकड़न, दाहिने-बाएं देखने में पूरा शरीर घुमाना पड़ना
  • हाथों में कमजोरी या चीज़ें छूट जाना

आखिरी कैटेगरी पर गौर से पढ़ें, क्योंकि यही सबसे ज़रूरी हिस्सा है। जब सीधी रीढ़ की नस (spinal cord) दबने लगती है, तो लक्षण बदल जाते हैं, बटन लगाने या चाबी घुमाने जैसे बारीक काम में हाथ नहीं मानना, चलते वक्त संतुलन बिगड़ना, या पेशाब-पाखाने का नियंत्रण ढीला हो जाना। Johns Hopkins Medicine इन्हें गंभीर लक्षणों में गिनता है और ऐसी हालत में देर न करते हुए डॉक्टर से मिलना बताता है।

डॉक्टर कैसे पता लगाते हैं?

पहले डॉक्टर आपसे लक्षण और आपकी दिनचर्या समझते हैं, फिर गर्दन की जांच करते हैं। ज़रूरत पड़ने पर X-ray से हड्डियों की, और MRI से डिस्क व नसों की सफाई से जांच हो पाती है। ध्यान रहे, हर गर्दन दर्द वाले को MRI करवाने की ज़रूरत नहीं होती; डॉक्टर जांच के बाद तय करते हैं।

सर्वाइकल का इलाज: संभलकर आगे बढ़ें

अच्छी खबर यह है कि ज़्यादातर लोगों को सर्जरी तक जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। इलाज का पहला पहरा हमेशा अन्य तरीकों से शुरू होता है।

घर से मिलने वाली राहत नया दर्द है तो पहले 48 घंटे ठंडी सिकाई करें, और जो दर्द पुराना चल रहा है उसमें गर्म सिकाई (हीटिंग पैड या गर्म तौलिया) दिन में दो-तीन बार आराम देती है। हल्दी वाला दूध, तिल और दूध-दही जैसी चीज़ें शरीर को ताकत देती हैं, पर इन्हें इलाज मानकर दवा और एक्सरसाइज़ छोड़ देना भूल नहीं जाना चाहिए।

एक्सरसाइज़ और फिजियोथेरेपी NIH की मानें तो सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस के गैर-सर्जिकल इलाज का बड़ा हिस्सा है 4 से 6 हफ्तों की फिजियोथेरेपी, जिसमें गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले आइसोमेट्रिक और रेजिस्टेंस एक्सरसाइज़ शामिल हैं। घर पर आप धीरे-धीरे गर्दन घुमाना, कंधे कसकर छोड़ना और हल्की स्ट्रेचिंग शुरू कर सकते हैं, पर एक शर्त के साथ कि दर्द बढ़े तो वहीं रोकें और फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लें।

दवाइयां दर्द और सूजन के लिए डॉक्टर आमतौर पर NSAIDs वाली दवाएं देते हैं। फार्मेसी से खुद कोई भी दवा लेने की गलती न करें, दर्द बैठता दिखता है, पर असली वजह वैसी ही रहती है। गहरे दबाव वाले मामलों में डॉक्टर स्टेरॉयड इंजेक्शन पर विचार कर सकते हैं।

सर्जरी कब? तभी, जब दवा-फिजियोथेरेपी से राहत न मिले और नसों या रीढ़ की नस पर दबाव गंभीर हो। यह बहुत छोटा हिस्सा है,  मेयो क्लिनिक के मुताबिक सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस ज़्यादातर बिना सर्जरी के मैनेज हो जाता है।

 

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सर्वाइकल से बचने के आसान तरीके

दिन में बस कुछ छोटी आदतें बदलकर आप गर्दन दर्द से बड़ी हद तक बच सकते हैं:

  • हर 30 मिनट में उठें। डेस्क पर बैठे-बैठे गर्दन और कंधे घुमाएं, दो मिनट चलें।
  • फोन को आंखों के स्तर तक उठाएं। गर्दन फोन की तरफ झुकेगी, तो दर्द को रोकना मुश्किल है।
  • स्क्रीन को आंखों की लाइन में लाएं। लैपटॉप के नीचे कोई किताब रखकर उसे ऊंचा कर लें।
  • पतला, चौड़ा तकिया रखें और पेट के बल सोने से बचें।
  • भारी बैग बारी-बारी कंधों पर बांटें और सिर पर भारी सामान रखने की आदत छोड़ें।
  • धूम्रपान छोड़ें – डिस्क की उम्र के लिए यह सबसे बुरी आदतों में से एक है।

 

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कब डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है?

घरेलू देखभाल के बाद भी अगर दो हफ्ते तक दर्द काबू नहीं हो रहा, तो डॉक्टर से मिलना ठीक है। पर कुछ लक्षणों में देर बिल्कुल नहीं करनी चाहिए; बांहों या पैरों में कमजोरी बढ़ना, चलते-फिरते संतुलन बिगड़ना, हाथों के बारीक काम में हाथ न मानना, या पेशाब-पाखाने के नियंत्रण में दिक्कत। ये लक्षण बताते हैं कि रीढ़ की नस पर दबाव बढ़ रहा है, और इसमें जितनी जल्दी जांच होगी, उतना बेहतर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. सर्वाइकल कितने दिन में ठीक होता है?

इसका जवाब वजह और गंभीरता पर निर्भर करता है। मांसपेशियों के खिंचाव वाला दर्द कुछ दिनों से लेकर हफ्तों में ठीक हो सकता है, जबकि घिसाव वाले मामलों में फिजियोथेरेपी के साथ कुछ हफ्तों तक देखभाल करनी पड़ती है।

2. क्या सर्वाइकल पूरी तरह ठीक हो सकता है?

उम्र से जुड़ा घिसाव तो उलट नहीं सकता, पर लक्षणों को पूरी तरह काबू किया जा सकता है। सही पोस्चर, रोज़ की एक्सरसाइज़ और समय पर इलाज से ज़्यादातर लोग आरामदायक जिंदगी जी लेते हैं।

3. सर्वाइकल में कैसे सोना चाहिए?

पीठ या करवट के बल, पतले और गर्दन की सर को सहारा देने वाले तकिये पर सोएं। पेट के बल सोने से गर्दन पूरी रात गलत कोण में रहती है।

4. क्या सर्वाइकल से सिरदर्द होता है?

हां। गर्दन के पीछे की मांसपेशियों और नसों की समस्या से सिर के पीछे या एक तरफ जाने वाला सिरदर्द काफी आम है, जिसे cervicogenic headache कहते हैं।

5. सर्वाइकल में क्या नहीं करना चाहिए?

अचानक गर्दन झटके से घुमाना, ऊंचे तकिये पर सोना, देर तक झुकी गर्दन से फोन चलाना, सिर पर भारी सामान रखना और बिना डॉक्टर की सलाह दर्द की दवाएं लेते रहना, इन सबसे बचें।

6. क्या हर सर्वाइकल मरीज को सर्जरी करानी पड़ती है?

बिल्कुल नहीं। बहुत ही कम मामलों में सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है, मुख्य रूप से तब जब नसों पर दबाव गंभीर हो और अन्य इलाज काम न कर रहे हों।

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